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Indigo Books
Memoirs

Nainitala Nainitala: Ek Shehar Smritiyon Mein

P
Author: Pushpesh Pant
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Paperback
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आदमी ही शहर में नहीं बसता, शहर भी आदमियों में बसते हैं। दरअसल, हरेक आदमी की अपनी ज़मीन और जड़ें होती हैं, जिनसे वह ताउम्र आज़ाद नहीं होना चाहता; भले ही ज़िन्दगी की भागमभाग—उसकी मर्ज़ी से या उसके चाहे बिना—उसे उनसे कितना भी दूर कर दे। बेदख़ली के बावजूद वह अपनी ज़मीन को दिल में आबाद कर लेता है और इस तरह अपनी जड़ों को ज़िन्दा रखता है।

‘नैनीताला नैनीताला’ किताब इस सचाई का शिद्दत से अहसास कराती है, जिसमें पुष्पेश पन्त ने नैनीताल का ऐसा रससिक्त बखान किया है जो इस पहाड़ी शहर से उनके अपने रिश्ते का बयान तो है ही; अनगिनत लोगों, इमारतों, दुकानों, सड़कों, ढलानों, चढ़ाइयों, गाड़ियों, सूर्योदय, सूर्यास्त समेत तमाम तरह के नज़ारों के हवाले से उतना ही पुख़्ता शहरनामा भी है। उनका निजी भी इस किताब में जाने-देखे-सुने लोगों के क़िस्सों के साथ मिलकर एकमेक हो गया है।

गागर में सागर की मानिन्द नैनीताल का भूगोल, इतिहास, संस्कृति, समाज, आर्थिकी सब कुछ अपने भीतर समेटे हुए; जितना संस्मरण उतनी ही शहरगाथा!

ग़ौर से देखें तो इसमें एक झलक उस हिन्दुस्तान की भी दिख जाएगी जिसकी बुनियाद बेशक सुदूर अतीत में पड़ गई थी लेकिन जो आज़ादी के आसपास शक्ल ले रहा था और उसके बाद के एक-दो दशक में मुकम्मल हुआ।

यादों का सफ़रनामा!
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