हिन्दी गद्य-साहित्य का समग्र और व्यवस्थित अध्ययन। सभी स्तरों पर नवीनतम सामग्री का समावेश। अवधारणाओं के विकास और सामाजिक सन्दर्भों के बदलाव की द्वन्द्वात्मक स्थिति का विवेचन। नवीनतम गद्य-विधाओं का विशद विवेचन। वैचारिक अन्तर्धाराओं के सकारात्मक पक्ष पर बल। उनतीस गद्य लेखकों का सारगर्भित, सन्तुलित और आग्रह-मुक्त विवेचन। ''यह हिन्दी के गद्य-साहित्य का प्रामाणिक दस्तावेज है। समग्रता और सघनता दोनों दृष्टियों से यह पुस्तक महत्त्वपूर्ण है। समग्रता का आलम यह है कि लेखक ने भारतेन्दु पूर्व से लेकर आज तक के हिन्दी गद्य के विकासमान स्वरूप की प्रामाणिक पहचान प्रस्तुत की है तथा हर विधा में लिखी गयी सभी महत्त्वपूर्ण रचनाओं और पुस्तकों का लेखा-जोखा एवं आकलन प्रस्तुत किया है। यहाँ तक कि पत्र-पत्रिकाओं का भी संक्षिप्त किन्तु प्राय: समग्र परिचय दिया है। यह पुस्तक गद्य-साहित्य का इतिहास भी है और मूल्यांकन भी। इतिहास है, इसलिए गद्य-भाषा और उसमें लिखी जा रही विविध साहित्य विधाओं के क्रमिक विकास की स्पष्ट और प्रामाणिक पहचान उभरती है। इस प्रक्रिया में लेखक ने विविध साहित्यांदोलनों और वादों की मूल प्रकृति का विश्लेषण किया है। मूल्यांकन भी है। अत: लेखक ने विविध लेखकों और उनकी कृतियों का विशेषत: प्रमुख कृतियों का बहुत थोड़े में किन्तु सारभूत रूप में विश्लेषण और मूल्यांकन किया है।' विषय-सूची खण्ड : एक : हिन्दी गद्य का स्वरूप-विकास, खण्ड : दो : हिन्दी-गद्य की विधाओं का विकास, हिन्दी आलोचना का विकास, हिन्दी उपन्यासों का विकास, हिन्दी कहानियों का विकास, हिन्दी नाटकों का विकास, गद्य साहित्य की अन्य विधाएँ, खण्ड : तीन : मूल्यांकन, भारतेन्दु हरिश्चन्द्र, प्रतापनारायण मिश्र, आचार्य महावीरप्रसाद द्विवेदी, बाबू श्यामसुन्दर दास, आचार्य रामचन्द्र शुक्ल, प्रेमचन्द, जयशंकर 'प्रसाद', वृन्दावनलाल वर्मा, बाबू गुलाबराय, पं० माखनलाल चतुर्वेदी, महा पण्डित राहुल सांकृत्यायन, सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला', सुमित्रानन्दन पंत, इलाचन्द्र जोशी, यशपाल, भगवतीचरण वर्मा, जैनेन्द्र कुमार, पं० नन्ददुलारे वाजपेयी, पं० शान्तिप्रिय द्विवेदी, पं० हजारीप्रसाद द्विवेदी, महादेवी वर्मा, रामधारी सिंह 'दिनकर', उपेन्द्रनाथ 'अश्क', सं० ही० वात्स्यायन 'अज्ञेय', डॉ० रामविलास शर्मा, विष्णु प्रभाकर, डॉ० नगेन्द्र, अमृतलाल नागर, फणीश्वरनाथ 'रेणु', मूल्यांकन, उपसंहार, परिशिष्ट, पत्र-पत्रिकाओं का संक्षिप्त इतिहास, हिन्दी का विश्वरूप, सहायक ग्रन्थ-सूची, लेखकानुक्रमणिका।