इस पुस्तक में एक ऐसी प्रेमकथा को दिया गया है, जिसे शाश्वत प्रेम की श्रेणी में रखा जा सकता है। यह बहुत ही धाराप्रवाह भाषा में लिखी गई है और पूर्णत: नाटक की शैली में है।
इसमें रंजना, अमर, अमला के परंपरागत त्रिकोणात्मक प्रेम की दास्तान दोहराई गई है। रंजना उन्मुक्त प्रेयसी व पत्नी दोनों के रूप में अतृप्त ददखाई देती है और उसकी मर्मस्पर्शी बातें लोगों के दिलों को छू जाती हैं।