बेहतर से बेहतरीन बनने का सतत प्रयास ही व्यक्तित्व को साधारण से महान बनाने की क्षमता रखता है। आचरण की सकारात्मकता और कोमलता ही व्यक्तित्व के आकर्षण में वृद्धि करती है। संबंधों की गुणवत्ता और व्यापकता ही व्यक्तित्व की पूँजी होती है। अपनेपन का बोध संबंधों को दृढता प्रदान करता है। अपनेपन का यही बोध ही सुख दुख का निर्धारण करता है। अपनेपन और संबंधों की व्यवहारिकता को समझने से फ़ायदा क्या है, और नुक़सान क्या है? इसे बग़ैर समझे कोई कैसे जान सकता है? संयमित आचरण और व्यवहार कुशलता के लिए हमें संबंध तथा संबंध के कारकों को स्पष्ट तौर पर समझना निश्चित ही फ़ायदेमंद होगा।
यह पुस्तक हमारे आचरण और संबंधों की सामान्य मौलिक समझ देती है।