साल 2005 में एकता कपूर के बालाजी टेलीफ़िल्म्स की राइटर्स एंड क्रिएटिव टैलेंट हंट में सेलेक्ट होने के बाद शरद त्रिपाठी ने न सिर्फ़ अपनी मेडिकल की पढ़ाई छोड़ी बल्कि घरवालों की इच्छा के विपरीत घर से भागकर मुंबई पहुँच गए। सपना राइटर बनने का था, और बने भी। पंद्रह साल तक टीवी के लगभग 50 से भी ज़्यादा शोज़ लिख चुके शरद ने प्रकाश झा प्रोडक्शंस के लिए फ़िल्म लिखी, बहुत सारे गाने लिखे, विभिन्न मंचों पर कविताएँ और कहानियाँ भी पढ़ीं। नेटफ़्लिक्स और अमेज़न जैसे ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म पर इनके शोज़ और फ़िल्में तो हैं ही, अब किताब लेखन के क्षेत्र में भी इन्होंने क़दम रख दिया है। नब्बे के दशक की इन चटपटी कहानियों के साथ इन्हें उम्मीद है कि आप पाठकों का ढेर सारा प्यार मिलेगा।